Sunday, May 23, 2010

इसे ही छोड़ो

20-20  वर्ल्ड  कप  से  इंडियन  टीम  के  बाहर  हो   जाने  पर  हो-हल्ला  हो  रहा  है . इस  खाकसार  को  टीम  के  कई  खिलाडियों  से  बात  करने  का  मौका  मिला . बातचीत  ऑन  रिकार्ड  कर  रहा  हूँ , इसलिए  सबके  नाम  ऑफ  रेकौर्ड  कर  रहा  हूँ . 


सवाल- आप  इतना  महत्वपूर्ण  टूर्नामेंट  हार  गए .  आखिर  आप  करते  क्या  हैं . बताइए  आपकी  दिनचर्या  क्या  है ?
जवाब- सुबह 12 बजे  सोकर  उठते  हैं, क्यूंकि  सुबह  5 बजे  सोते  हैं .  आइपिअल  की  पार्टियों  में  हमारा  जाना  कम्पलसरी  है .  जिन्होंने  हमें  खरीदा  है, वो  हमसे  क्रिकेट  के  अलावा  सब्जी  काटने  से  लेकर  दारू  बेचने  तक  का  काम  ले  सकतें  हैं .  सो  उनकी  पार्टी  में  जाकर  सुबह  12 बजे  उठते  हैं .  फिर  देखते  हैं  की  खास  श्येद्यूल  क्या  है .  मतलब  साबुन  के  लिए  मॉडलिंग  करनी  है  या  ब्यूटी  क्रीम  के  लिए .  फिर  तैयार होकर  निकल  पड़ते  हैं .  2 से  शाम  7 बजे  तक  शूटिंग  चलती  है .  शाम  7 के  बाद  आइपिअल   के  मैच  हो  लेते  हैं . फिर  मैच  के  बाद  पार्टी .  पार्टी  के  बाद  उठना  और  निकल  पड़ना  तेल-साबुन  बेचने . लाइफ  बिजी  हो  गयी  है .
सवाल- देखिये, बग़ैर  रियाज़  और  प्रक्टिस  के  तो  आप  कोई  काम  कायदे  से  नहीं  कर  सकते . 
जवाब- बिलकुल  सही  कहा  आपने .  तेल-साबुन  बेचने  वाले  ऐड  का  हम  भारी  रियाज़  करते  हैं . 5 घंटे  में  4 घंटे  तो  रियाज़  में  ही  निकलते  हैं . 1 घंटा  ही  शूटिंग  होती  है . हम  अपने  काम  के  प्रती  बहुत  कमीटेड  हैं . 

सवाल- सवाल  यह  उठता  है  की  आखिर  खेल  कहाँ  है  आपकी  दिनचर्या  में ? आप  खेलते  कब  हैं ? मतलब  प्रैक्टिस  कब  करते  हैं ?
जवाब- देखिये  हमारी  कमाई   में  से  80 परसेंट  कमाए  इश्तेहारों  से  आती  है, सो  उस  पर  ध्यान  देते  हैं . आप  किसी  भी  दिन  हमारा  रूटीन  देख  लीजिये, 5-7 घंटे  तो  इश्तेहारों  में  लगाते  ही  लगाते  हैं .

सवाल- पर  धोनी  की  टीम  आइपिअल  में  जीत  गई  लेकिन  20-20 वर्ल्ड   कप  में  हार  गई, यह  क्या  बात  हुए ?
जवाब- देखिये  सवाल  है  की  आइपिअल  टूर्नामेंट ज्यादा  महत्वपुर्ण  है  या  वर्ल्ड  कप  टाइप  टूर्नामेंट . आइपिअल  से  कितनी  डांसरों  को  रोज़गार  मिलता  है . कितनी  पार्टी  करने  वाली  कम्पनीयों   को  रोज़गार  मिलता  है . वर्ल्ड  कप  वगैरह  में  न  डांसरों  को  रोज़गार  मिलता  है  न  पार्टी  करने  वाली  पार्टियों  को .

सवाल- दिन  के  किस  हिस्से  में  आप  अपने  देश  को  रखते  हैं ? देश  के  लिए  कब  खेलते  हैं ?
जवाब- हमने  एनालिसिस  करके  पाता  लगाया  है  की  सबसे  कम  पैसा  देश  के  लिए  खेलने  को  मिलता  है  और  सबसे  ज्यादा  हल्ला  इसमें  हार-जीत  पर  होता  है .  सो  हमने  आइपिअल  हित  में  तय   किया  है  की  सारे  खिलाड़ी  देश  के  लिए  खेलना  बंद  कर  देंगे .

सवाल- आप  बताइए  की  वर्ल्ड  कप  में  हार  से  बचने  का  क्या  तरीका  है ?
जवाब- सिंपल, इसमें  पार्टीसिपेट   करने  ही  न  जाएँ, तो  हारेंगे  कैसे. सिंपल  तरीका  यह  है  की  वर्ल्ड  कप  वगैरह  में  खेलना  बंद  करना  चाहिए . अब  मेरा  शूटिंग  का  टाइम  हो  रहा  है .

इसके  बाद  खिलाड़ी  क्रीम  पाउडर  लगाकर  शूटिंग  में  बिजी  हो  गए .




लेखक- अलोक  पुराणिक   
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Saturday, May 15, 2010

JJ Games

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Thursday, May 13, 2010

छुट्टन भाई एमपी

छुट्टन  भाई  (नाम  बदला  हुआ  है, उनके  विचारों  की  मौलिकता  और  महानता  को  देखकर  ऐसा  करना  पड़  रहा  है) ने  फैसला  कर  लिया  है  की  आने   वाले  चुनाव  में  उतरेंगे .  छुट्टन  भाई  और  यह  खाकसार  कक्षा  5 तक  साथ  पढ़े  हैं .  इसके  बाद  छुट्टन  भाई  ने  ज्ञान  का  प्रैक्टिकल  रास्ता  पकड़ा  और  सीधे  कर्मभूमी  में  उतर  लिए . सिनेमा  टिकटों  की  ब्लैक, जेबकटी, अपहरण  के  रास्ते  अब  वह  नेता  बनना  चाहते  हैं .  चुनावी  कवरेज  के  लिए  उनका  इंटरव्यू  करने  चला  गया .

सवाल- आप  पौलेटिक्स  में  आने  की  बात  कर  रहे  हैं .  आप  के  आदर्श  क्या  हैं ?
जवाब- हमारा  आदर्श  पकिस्तान  है, बहुत  सेट  पौलेटिक्स  है  वहां  की .  मज़े  हैं, कम   से   कम   पौलेतीशिंस  के .   
सवाल- पर कैसे, कानून  और  व्यवस्था  से  निपटने  की  आपकी  क्या  पॉलिसी  होगी ?
जवाब- पकिस्तान  का  फंडा   हमने  सीखा  है- बर्खास्त  करो .  पकिस्तान  में  यही  होता  है  की  प्रेसिडेंट   चीफ  जस्टिस  को  बर्खास्त  कर  देते  हैं .  चीफ  जस्टिस  प्रेसिडेंट  को  बर्खास्त  कर  देते  हैं .  प्रेसिडेंट  सुरक्षा  सलाहकार  को  बर्खास्त  कर  देते  हैं .  इस  तरह  से  सब  एक  दूसरे  को  बर्खास्त  करते  रहें, तो  पब्लिक कन्फ्यूजिया  जाती  है  की  भैया  अब  सारे  ही  बर्खास्त  हैं, कोई  कुछ  नहीं  कर  सकता, सिवाए  लश्कर, तस्कर  वगैरा  के .  सो  घर  से  बहार  निकलना  ही  बंद  कर  दो .  पब्लिक  घर  से  निकलना  ही  बंद  कर  दे  तो  लौ   एंड  आर्डर  की  प्रौब्लम  उठती  ही  नहीं  है .

सवाल - आपकी  विदेश  नीती  क्या  होगी ?
जवाब - इसमें  भी  पकिस्तान  से  सीखा  है, जो  भी  विदेशी  मेहमान  आयें, उसे  बस  में  बिठाकर  ले  जाओ .  फिर  रास्ते  में  तैनात  बंदूकधारियों  से  कहो  की  चला  भाई  गोली-वोली .  गोलाबारी  में  मेहमान  घबरा  जाएँ, तो  उन्हें  अस्पताल  में  ले  जाओ .  संतरा, अनार  वगैरा  दो .  मेहमान  गदगद  हो  जायेंगे . अभी  जान  के  लाले  पड़े  हुए  थे, अब  संतरा  मिल  रहा  है .  बम  और  संतरे  के  बैलेंस  से  हम  विदेशी  मेहमानों  को  खुश  कर  सकते  हैं .  अभी  श्रीलंका  के  संघकारा, महेला  जयवर्धने, मुरलीधरन  ऐसे  ही  बहुत  खुश  होकर  लौटे  हैं .  मुरलीधरन  तो  अपनी  टी-शर्ट   भी  बस  ड्राइवर  को  गिफ्ट  कर  गए  हैं .  विदेशी  मेहमानों  को  ऐसे  ही  हम  भी  खुश  करेंगे .

सवाल- आपकी  आर्थिक  नीती  क्या  होगी ?
जवाब- हम  बुनियादी  बातों  की  बात  कर  रहे  हैं, बुनियाद  की  और  जा  रहे  हैं .  इंसानी  सभ्यता  की  बात  जंगल  में  रखी  गयी  थी .  पकिस्तान  के  रस्ते  पर  ऐसा  डौल  जमा  देंगे  की  हर  बन्दे  के  पास  एके  47, हर  एक  के  पास  मिसाइल, हर  एक  के  पास  न्यूक्लीयर  बम  होगा .  जब  मन  करे, तब  फोड़  दे .  सब  फूट-फाट  जायेगा .  फिर  से  सब  जंगल  लौटेंगे, सेब, केला  खायेंगे .  खरगोश, हिरन  को  मार  गिराएंगे .  रात  में  गुफा  में  घुसकर  सो  जायेंगे . जंगल  में  शौपिंग  मॉल  नहीं  होंगे, जो  कंज्यूमर्स  को  ठग  नहीं  पाएंगे .  मोबाईल  ओपेरटर  नहीं  होंगे, तो  कस्टमर  को  वो  चूना  नहीं  लगा  पाएंगे .  इस  तरह  से  हम  पब्लिक  को  तमाम  तरह  के  थागियों  से  बचायेंगे .  हमारा  नया  स्टाइल, ठग  के  खिलाफ  मिसाइल . 
ऐसे  मौलिक  और  महँ  विचार, मैं  तो  इम्प्रेस  हो  गया  हूँ  और  आप ?


लेख़क- आलोक पुराणिक       
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Saturday, March 13, 2010

सस्ते की रेस

आज के इस महंगाई रिमलावट के जानलेवा यानी डेडली कौम्बीनेशन मयी युग में जब किसी मेगामार्ट का वाक्य- सबसे सस्ता, सबसे अच्छा दिखाई पड़ता है तो ऐसा भ्रम होने लगता है जैसे अम्तीवी में चौपाल और फैशन टीवी में कृषी दर्शन आने लगा हो  चाहते हुए भी आप इस सौल्योषण के लिए उस मार्ट की अट्रैक्टिव आर्ट में खींचकर इंट्री ले ही लेते हैं


        जाते ही सबसे पहले एक होस्त्रूपें सेल्सगर्ल के दर्शन ऐसा फीलगुड कराते हैं, जैसे मेगामार्ट में आयें हों बल्की किंगफिशर की एयार्लैंस में दाखिल हो रहे हों पता चलता है मोहतरमा डेड हज़ार रूपये मंथली विथौत मेंटीनेंस अलाउंस में अपनी सर्विस प्रोवाइड कर रही हैं  यानि की सबसे अच्छा, सबसे सस्ते की शुरुवात यहीं से  हो  जाती है आप जैसे ही अन्दर जाते हैं वैसे ही सो कॉल्ड एक्सक्लूसिव ऑफर्स के टैग आप के सर टकराकर अपने हिट -हॉट ऑफर्स बयां करने लगतें हैं


      मेगामार्ट का सबसे हॉट ऑफर होता है पांचाली ऑफर यानि की बाई 1 गेट 5 । महाभारत काल में यह हॉट था ही और आज भी सुपर-डुपर हिट है आप झट से उसे खरीदकर पांडवों की कैटेगरी में शामिल हो जाते हैं, भले ही उसका प्रिजे इतना सअर्प्रिज़े  करने वाला होता है की उसके दाम में इतनी सहरत जाएँ की पूरे खानदान का का हो जाये
       
इन सबसे  सस्ते  और  सबसे अच्छे मेगामार्ट का  अगला  जाल  होता  है  सबको  बेहाल  करने  वाली  दाल, जिसको  फ्री  में  देने  का  ऐलान  इतने  बीगाछारों  में  लिखा  होता  है  की  जिसे  अँधा  भी  पढ़   ले .  साथ  ही  उसके  नीचे  कंडीशन  अप्लाई  वाला  ट्विंकल  स्टार  इतना  लिटिल  बना  होता  है  की  उसे  मैक्रोस्कोपे  से  भी  न  देखा  जा  सके .  पता  चलता  है  की  उस  1 किलो  दाल  को  फ्री  में  पाने  के  लिए  पहले  आपको  10 किलो  रिफाइंड, 15 किलो  चीनी, 50  क्लियो  आटा, 4 बोतलें  टोमैटो  कैचप  और  5 टोएलेट क्लीनर  खेरीदने  की  कंडीशन पूरे रनी होती हैभले ही उससे आपके साल भर के बजट की कंडीशन क्यों सीरीयस हो जाये । 

इस  सबसे  सस्ते, सबसे  अच्छे  चक्रव्यू  में  किफयत रुपी  जीत  को  पाने  आप  घुस  तो  जाते  हैं  लेकिन  जल्द  ही  आपकी  हालत  अभीमन्यू  से  भी  बदतर  होती  चली  जाती  है .  दुर्योधन  रूपी  ऑफर्स  और  दुशाशन   रूपी  कंडीशन  के  प्रहार  झेलते  हुए  आप  सारे  गेट  पार  कर  बहार  तो  आ  जाते  हैं  फिर  आपकी  फिजिकल  डेथ  भले  ही  न  हुए  हो  पर  फैनेंशिअल  डेथ  ज़रूर  हो  चुकी  होती  है . 
शायद  आज  के  युग  में  सबसे  सस्ते  सबसे  अच्छे  का  काउन्सेप्त  मेगामार्ट  में  न  होकर  कहीं  और  शिफ्ट  हो  गया  है .  सबसे  सस्ता  अब  है  यहाँ  का  आम  आदमी, जिसे  आतंकवादी  सरेआम  गोलियों  से  भून  देते  हैं .  और यहाँ  की  व्यवस्था  के  कहने  ही  क्या  जो  कसाब  जैसे  दरिन्दे  को  अपने  खर्चे  पर  पाल   रही  है .  सबसे  सस्ता  है  अब  इस  देश  की  जनता  का  वोट  जिसे  नेता  कोरे  वायदे  कर  झटक  लेते  हैं  और  सबसे  अच्छा  है  यहाँ  का  प्रजातंत्र  जिसमें  वही  नेता  सरकार  बनाने  के  लिए  बिक  जाते  हैं  और  करोड़ों  गटक  लेते  हैं . 






लेखक - अलंकर  रस्तोगी 


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